परमाणु (Atom) :-
किसी भी पदार्थ का आधार परमाणु होता है अर्थात्
सभी पदार्थ परमाणुओं से मिलकर बने होते है.
दो या दो से अधिक परमाणु
मिलकर अणु का निर्माण करते है और अणु मिलकर हमारे चारों ओर उपस्थित सभी चीजों का
निर्माण करती है. अत: हम कह सकते है सभी वस्तुओं और पदार्थो का आधार परमाणु ही
होता है.
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| Atom |
परमाणु तीन कणों से मिलकर
बना होता है
1. इलेक्ट्रोन
2. प्रोटॉन
3. न्यूट्रॉन
इलेक्ट्रोन :- इलेक्ट्रोन की खोज जे.जे. थॉमसन ने की
थी। इसकी इकाई ऋणावेश होती है। इसका विराम द्रव्यमान 9.1 × 10-31 Kg होता है। ये परमाणु के नाभिक के चारों ओर अपनी
निश्चित कक्षाओं में चक्कर काटते हैं।
प्रोटॉन :- इसकी खोज गोल्ड स्टीम (Goldstein) ने की थी। इसका नाम Ernest Rutherford ने दिया इस पर इलेक्ट्रान के आवेश के बराबर धनावेश होता है।
इसका आवेश 1.6 ×
10-19 कूलॉम होता है। यह परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन
के साथ पाया जाता है।
न्यूट्रॉन :- इसकी खोज चैडविक ने की थी। वह विद्युत
उदासीन कण है। इसका भार प्रोटॉन के भार (1.6748 × 10-27 Kg) के बराबर होता है। प्रोट्रॉन के साथ नाभिक में न्यूट्रान
स्थायी होता है परन्तु नाभिक के बाहर स्वतंत्र अवस्था में अस्थायी होता है।
प्रोटॉन और न्यूट्रॉन
परमाणु के नाभिक में पाये जाते
है, नाभिक परमाणु का केंद्र
भाग होता है. जहाँ प्रोटॉन पर धनावेश होता है, इलेक्ट्रोन पर ऋणात्मक आवेश और न्यूट्रॉन आवेश रहित होता है
अर्थात् न्यूट्रॉन पर कोई आवेश विधमान नही रहता
प्रोटॉन और न्यूट्रॉन भी
कॉर्क और ग्लुन्स नामक कणों से मिलकर बने होते है
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की परिभाषा (Dalton’s Atmoic Theory Definition in Hindi) :-
डाल्टन के परमाणु
सिद्धांत के अनुसार, “प्रत्येक पदार्थ
छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है जिन्हें परमाणु कहते हैं और परमाणु को किसी
भी भौतिक या रासायनिक विधि से विभाजित नहीं किया जा सकता है।”
कई अवधारणा के बारे में
दुनिया को पता चला और इन सब कारणों से डाल्टन का परमाणु सिद्धांत रसायन विज्ञान का
सैद्धांतिक आधार बना।
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| John Dalton |
पदार्थ (matter) हमेशा से ही वैज्ञानिकों के बीच शोध का अति महत्वपूर्ण विषय रहा है। वैज्ञानिक हमेशा से जानना चाहते थे कि पदार्थ किन मूलभूत कणों से मिलकर बना है। उनके गुण क्या होते हैं। उनका आकार कैसा है।
यही कारण था इस विषय को
लेकर अनेक सिद्धांत प्रतिपादित हुए। इन सवालो के हल जानने का पहला प्रयास एक
ब्रिटिश अध्यापक जॉन डाल्टन ने सन् 1808 में किया। डाल्टन का परमाणु सिद्धांत द्रव्यमान
संरक्षण का नियम (law of mass conservation) और स्थिर अनुपात का नियम (Law of constant
proportion) पर आधारित था।
यह भी पढ़े :- कोशिका क्या है ,कोशिका सिद्धांत ,प्रोकैरियोटिक व यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर, कोशिका के प्रमुख भाग
डाल्टन के सिद्धांत के मुख्य बिंदु (Main Points of Dalton’s Atmoic theory
in Hindi) :-
प्रत्येक तत्व अतिसूक्ष्म
अविभाज्य कणों से मिलकर बना है जिन्हें परमाणु (atom)कहते हैं।
एक तत्व की सभी परमाणु
आकार तथा गुणों में समान होते हैं किंतु भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न-भिन्न
होते हैं।
भिन्न भिन्न तत्वों के
परमाणु के गुण भी भिन्न भिन्न होते हैं।
परमाणु अविनाशी (indestructible)
होता है अर्थात रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु
ना तो उत्पन्न होते हैं और ना ही नष्ट होते हैं।
तत्वों के परमाणु वापस
में संयोग करके संयुक्त परमाणु बनाते हैं तथा आधुनिक शब्दों में इस संयुक्त परमाणु
को अणु कहते हैं।
बनने वाले संयुक्त परमाणु
में परमाणुओं कि आपेक्षिक संख्या और उनका प्रकार निश्चित होता है।
डाल्टन परमाणु सिद्धांत के अनुप्रयोग (Applications of Dalton’s Atomic
Theory in Hindi) :-
डाल्टन के परमाणु
सिद्धांत पदार्थ की संरचना के
मूलभूत विचार को प्रस्तुत करता है। इसके अनुसार परमाणु पदार्थ के निर्माण की सबसे
छोटी इकाई है।
डाल्टन का परमाणु
सिद्धांत उस समय तक ज्ञात
रासायनिक संयोग के नियम (Law of chemical composition) की अवधारणा को समाहित करता है,जैसे बिंदु (4) द्रव्यमान संरक्षण तथा बिंदु (5) निश्चित अनुपात के नियम को प्रदर्शित करता है।
डाल्टन का परमाणु
सिद्धांत गुणित अनुपात के नियम (Law
of multiple proportion) की भी व्याख्या करता है।
यह सिद्धांत भिन्न भिन्न
तत्वों के परमाणुओं में विभिन्नता को भी प्रदर्शित करता है।
डाल्टन परमाणु सिद्धांत की सीमाएं (limitations of Dalton’s atomic Theory
in Hindi) :-
डाल्टन के अनुसार तत्वों के निर्माण की सूक्ष्मतम इकाई परमाणु
है जबकि यौगिक की सूक्ष्मतम इकाई संयुक्त परमाणु (compound atom) है, वास्तव में जिस संयुक्त परमाणु की अवधारणा डाल्टन ने प्रस्तुत की वह अणु था।
यह सिद्धांत बर्जीलियस
परिकल्पना की व्याख्या नहीं करता जिसने प्रतिपादित किया कि ताप व दाब की समान
परिस्थितियों में गैसों के समान आयतन में परमाणुओं की संख्या समान होती है।
यह सिद्धांत इस तथ्य की
व्याख्या नहीं करता कि परमाणु आपस में क्रिया करके अणु क्यों बनाते हैं।
यह परमाणुओं तथा अणुओं की
ठोस, द्रव एवं गैस की भौतिक
अवस्थाओं में बलों की प्रकृति के विषय में कोई प्रकाश नहीं डालता है।
यह समस्थानिकों (isotopes)
की उपस्थिति तथा गेलुसाक के आयतन नियम (law
of gaseous volumes) की व्याख्या नहीं करता
है।
यह सिद्धांत इस तथ्य की
भी व्याख्या नहीं करता है कि भिन्न भिन्न तत्वों के परमाणु का द्रव्यमान, आकार और संयोजकता (valency) अलग-अलग क्यों होती है।
डाल्टन परमाणु सिद्धांत की वर्तमान स्थिति (Current Position of Dalton’s Atmoic
Theory in Hindi) :-
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन ,न्यूट्रॉन तथा अन्य उप परमाण्विक (sub-atomic) कणों की खोज से यह सिद्ध हो चुका है कि परमाणु
अविभाज्य नहीं है।
समस्थानिकों (isotopes)की खोज के पश्चात यह सिद्ध हो चुका है कि एक ही
तत्व के परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमान भिन्न भिन्न हो सकते हैं।
समभारिक (isobars) की खोज के बाद यह सिद्ध
हो चुका है कि भिन्न भिन्न तत्वों के परमाणु के द्रव्यमान समान हो सकते हैं।
नाभिकीय रसायन के उदय के
पश्चात एक परमाणु का दूसरे परमाणु में परिवर्तन संभव हो गया है।
परमाणु आपस में
भिन्नात्मक अनुपात में भी क्रिया कर सकते हैं।
आधुनिक परमाणुवाद भले ही डाल्टन
के परमाणु सिद्धांत (Atomic theory by John Dalton) से अलग है लेकिन रसायन विज्ञान में उनके
योगदान का बहुत ही महत्व है क्योंकि उनके सिद्धांत देने के बाद ही इलेक्ट्रॉन,
प्रोटॉन न्यूट्रॉन तथा अन्य कणों की खोज हुई।
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल - Rutherford Atomic Model
नील्स बोर का परमाणु मॉडल
- Neil's Bohr Atomic Model
थॉमसन का परमाणु मॉडल - Atomic
Model Of Thomson
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आपका कोई सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट के
जरिये हमसे पूछ सकते हैं।
दोस्तो आज में इस पोस्ट
में परमाणु के विषय में बताने जा रहा हु। इसमें हम परमाणु की परिभाषा ,परमाणु के मुख्य भाग, परमाणु संख्या , परमाणु सिद्धांत, आदि के बारे में जानेगे


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